Wednesday, 3 February 2016

भारतीय युवाओं का चरित्र विकास स्वामी विवेकानंद जी द्वारा



स्वामी विवेकानंद की १९वीँ सदी में दीं गयीं सीख तब से अब तक और आज से अगले कई सौ वर्षों तक उचित रहेंगी| स्वामी विवेकानंद कहते थे कि अपने पर विश्वास रखे, वीर बने, एकाग्र बने, मुक्त बने, देशप्रेमी बने और बढे चले चाहे राह में कितनी भी दिक्कते आए रुके नहीं, झुके नही| स्वामी विवेकानंद कहते थे कि पहले स्वयं को बदलो फिर किसी और को बोलो| स्वामी विवेकनद के विचारों से किसी भी व्यक्ति का व्यक्तित्व विकास हो सकता है| स्वामी विवेकानंद की दी गयी सीखों से हम जीवन जीने कि कला, वार्ता करने कि कला, आत्मविश्वास, प्रेम, स्वतंत्रता, एकाग्रता जैसे कई और गुण सीख सकते है| हम न केवल उनके विचारों का अध्ययन कर बल्कि उनके जीवन से भी कई सीख ले सकते हैं| स्वामी जी कहते थे – ‘उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए| स्वामी जी कहते थे कि उठो, निडर बनो और सारी ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर लो, और यह जान लो कि अपने किस्मत को बनाने वाले तुम हो| खुद से की गयी गलती का आरोप किसी और पर मत डालो| उनका शिकागो से दिया हुआ विश्व के लिए संबोधन “अमेरिका के बहनों और भाइयों..” मुझमे एक नयी उर्जा पैदा करता है,उनकी सीखों से मुझे जीवन को एक नए नज़रिए से देखने के लिए प्रेरित किया है| स्वामी विवेकानंद के विचारों ने मेरे चरित्र का विकास भी किया है|

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