Saturday, 20 August 2016



Anand’s visit to IIT Kanpur
-IIT Kanpur, 28 June 2016
Chess Grand master Dr.Vishwanathan Anand visited Indian Institute of Technology Kanpur today. He reached IIT Kanpur last evening. On the occasion of 49th Convocation between students, faculty, Director IIT Kanpur Prof. Indranil Manna, Chairman R.C Bhargava, Chief Guest Vice Chairman NITI AYOG Prof.Arvind Pangadia, and Anand was awarded with doctorate in Science approved from the Institute’s senate of IIT K. After the convocation program Dr.Anand had a tutorial session for chess playing students, staffs and faculties of the institute community. After the technical session of about half n hour, Anand leaved for the Visitor’s Hostel. After 1 hour, Institute organized a talk by Dr. Anand on His journey through chess. Where he told the audience about his career, he unfolded some funny and sad moments of his career. Before the talk Director Prof. Manna felicitated Dr.Anand and his wife. During his talk he unfolded his early years. He said he started playing chess from the age of 6 and his mother coached him. He was awarded with many national and international awards.

Wednesday, 3 February 2016

भारतीय युवाओं का चरित्र विकास स्वामी विवेकानंद जी द्वारा



स्वामी विवेकानंद की १९वीँ सदी में दीं गयीं सीख तब से अब तक और आज से अगले कई सौ वर्षों तक उचित रहेंगी| स्वामी विवेकानंद कहते थे कि अपने पर विश्वास रखे, वीर बने, एकाग्र बने, मुक्त बने, देशप्रेमी बने और बढे चले चाहे राह में कितनी भी दिक्कते आए रुके नहीं, झुके नही| स्वामी विवेकानंद कहते थे कि पहले स्वयं को बदलो फिर किसी और को बोलो| स्वामी विवेकनद के विचारों से किसी भी व्यक्ति का व्यक्तित्व विकास हो सकता है| स्वामी विवेकानंद की दी गयी सीखों से हम जीवन जीने कि कला, वार्ता करने कि कला, आत्मविश्वास, प्रेम, स्वतंत्रता, एकाग्रता जैसे कई और गुण सीख सकते है| हम न केवल उनके विचारों का अध्ययन कर बल्कि उनके जीवन से भी कई सीख ले सकते हैं| स्वामी जी कहते थे – ‘उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए| स्वामी जी कहते थे कि उठो, निडर बनो और सारी ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर लो, और यह जान लो कि अपने किस्मत को बनाने वाले तुम हो| खुद से की गयी गलती का आरोप किसी और पर मत डालो| उनका शिकागो से दिया हुआ विश्व के लिए संबोधन “अमेरिका के बहनों और भाइयों..” मुझमे एक नयी उर्जा पैदा करता है,उनकी सीखों से मुझे जीवन को एक नए नज़रिए से देखने के लिए प्रेरित किया है| स्वामी विवेकानंद के विचारों ने मेरे चरित्र का विकास भी किया है|

अटल बिहारी वाजपेयी



यह भारत के लिए बहुत गर्व की बात है कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी जैसे भारत रत्न हमे प्राप्त हुए| अटल जी बहुत साड़ी कलाओ के धनी हैं जैसे कि वह एक अच्छे वक्ता थे और साथ-साथ एक अच्छे श्रोता भी थे| उन्हें उनके ज़माने में मनाली की हसीन वादियों के बीच कवितायेँ लिखना बहुत पसंद था| अटल जी कहते हैं कि कविता उन्हें विरासत में मिली है| उनके पिता पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर रियासत के अपने ज़माने के जाने-माने कवियों में थे| अटल बिहारी वाजपेयी जी कि अग्रज भी कविताए लिखते थे| अटल बिहारी वाजपेयी जी कि कई काव्य रचनाये प्रसिद्ध हैं जिनमेगीत नहीं गाता हूँ’ ‘परिचय’ ‘आओ फिर से दिया जलायेशामिल हैं| उनके बहुत सारे काव्य संग्रह प्रकाशित हुए है, जो कि बहुत प्रसिद्ध है| वाजपेयी जी कहते है कि अगर वो राजनीति में ना आते तो वह कवि बनते| अटल जी कि आवाज़, भाषण और कविताओ की दुनिया दीवानी है| अटल जी ने सदा कविता लिखने कि प्रेरणा देश की घटनाओ को रखा, कभी कभी वह सामाजिक विषयों पर भी टिप्पणीपूर्ण कविताये लिखते थे|
वह भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में से एक थे और सन् १९६८ से १९७३ तक वह उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। सन् १९५५ में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, परन्तु सफलता नहीं मिली। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सन् १९५७ में बलरामपुर से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा में पहुँचे। सन् १९५७ से १९७७ तक जनता पार्टी की स्थापना तक वे बीस वर्ष तक लगातार जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे। मोरारजी देसाई की सरकार में सन् १९७७ से १९७९ तक विदेश मन्त्री रहे और विदेशों में भारत की छवि बनायी। वह ३ दशको से ज्यादा सांसद रहे| १९८० में जनता पार्टी से असन्तुष्ट होकर इन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की थी। जब ६ अप्रैल १९८० में भारतीय जनता पार्टी बनी तब उसका अध्यक्ष पद भी वाजपेयी जी को सौंपा गया। अटल जी दो बार राज्यसभा के लिये भी निर्वाचित हुए। लोकतन्त्र के सजग प्रहरी अटल बिहारी वाजपेयी एवं देश कि चहीते सांसद, वक्ता, कवि ने सन् १९९७ में प्रधानमन्त्री के रूप में शपथ ली और देश की बागडोर संभाली परन्तु पहली सरकार १६ दिनों में ही नस्मस्तक हो गयी क्योंकि उनकी सरकार को बहुमत नहीं मिला। फिर १९ अप्रैल १९९८ को अटल जी की सरकार १३ पार्टियों के गठबंधन के साथ बहुमत से अटल बिहारी वाजपेयी जी ने प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली और उनके नेतृत्व में १३ दलों की गठबन्धन सरकार ने पाँच वर्षों में देश के अन्दर प्रगति के अनेक आयाम पाए| इस १३ पार्टियों के गठबंधन से एन०डी०ए० का गठन हुआ जिसका श्रेय वाजपेयी जी को जाता है| अटल जी के नेतृत्व में देश कि पहली गठबंधन सरकार ने ५ साल केंद्र में सरकार चलाई| अटल राज में कई विकास कार्यो पर अमल किया गया जैसे १८ मई १९७४ का भारत का पहला सफल परमाणु बम परिक्षण जी कि पोखरन में स्व० डॉ० कलाम जी के नेतृत्व में हुआ| उनके राज में देश ने बहुत बड़ा भूकंप २००१ और २ चक्रवात, भयंकर बाढ़ सही फिर भी उन्होंने हमारे देश के सकल घरेलु उत्पाद को कम नहीं होने दिया| अटल जी ने हमारे विदेशी संबंधो को भी सुधारने का बहुत प्रयत्न किया जो कि व्यापार की दृष्टि से बहुत फायदेमंद था| वाजपेयी जी ने चीन के साथ भी संबंध सुधारने का प्रयत्न किया| अटल जी ने पाकिस्तान से दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए प्रथम भारत-पकिस्तान बस सेवा दिल्ली-लाहौर बस सेवा को शुरू की| अटल जी ने दिल्ली मेट्रो सेवा को भी हरी झण्डी दिखाई और देश में कई ऐसे विकास कार्यो को हरी झण्डी दिखाकर भारत रत्न के हकदार बने| और तो और भारत को चाँद पर ले जाने वाले भी वाजपेयी जी हैं| २००८ में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र श्रीहरिकोटा से देश का प्रथम अंतरिक्षयान चंद्रयान १ को सफल परिक्षण किया| इसमें कोई दोराए नहीं है की श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी एक बेहद अच्छे कवि, एक अच्छे और सफल सांसद और एक दूरदर्शी नेता और प्रधानमंत्री रहे है| इनका समय सुशासन का समय था और २०१५ में सरकार ने प्रति वर्ष वाजपेयी जी के जन्मदिवस २५ दिसंबर को सुशासन दिवस मानाने का ऐलान किया है|